घाटों पर पहुंची टास्क फोर्स, रास्ते चिन्हित हुए…
लेकिन वर्षों से चल रहे अवैध नेटवर्क का जिम्मेदार कौन?
कटनी। जिला प्रशासन ने एक बार फिर अवैध रेत उत्खनन और परिवहन के खिलाफ बड़ा अभियान चलाने का दावा किया है। कलेक्टर के निर्देश पर बड़वारा और बरही क्षेत्र के रेत घाटों का संयुक्त निरीक्षण कर अवैध परिवहन के रास्तों को चिन्हित किया गया है। लेकिन इस कार्रवाई के बीच कई ऐसे सवाल खड़े हो रहे हैं, जिनका जवाब खनिज विभाग और संबंधित एजेंसियों को देना होगा।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन अवैध रास्तों की पहचान अब की जा रही है, क्या वे एक-दो दिन में बन गए थे? यदि नहीं, तो आखिर इतने लंबे समय से चल रहे इस नेटवर्क पर विभाग की नजर क्यों नहीं पड़ी?
रास्ते बने, रेत निकली, ट्रैक्टर-दंपर दौड़े… फिर भी विभाग अनजान?
प्रशासन का कहना है कि कई कच्चे मार्गों का उपयोग अवैध परिवहन में किया जा सकता था। यदि ऐसा था, तो क्या इन रास्तों से पहले कभी रेत का परिवहन नहीं हुआ? स्थानीय लोगों का दावा है कि कई क्षेत्रों में लंबे समय से रात के अंधेरे में रेत का खेल चलता रहा है।
ऐसे में सवाल उठता है कि नियमित निगरानी और निरीक्षण का दावा करने वाला खनिज विभाग आखिर क्या कर रहा था? क्या विभाग को इन गतिविधियों की जानकारी नहीं थी या फिर जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई?
खनन बंद मिला या पहले से थी सूचना?
संयुक्त दल को निरीक्षण के दौरान अधिकांश घाटों पर खनन गतिविधियां बंद मिलीं। लेकिन क्षेत्र में चर्चा है कि निरीक्षण की सूचना पहले ही संबंधित लोगों तक पहुंच गई थी, जिसके चलते घाटों पर गतिविधियां रोक दी गईं।
यदि यह सच है तो यह भी जांच का विषय है कि प्रशासनिक कार्रवाई की गोपनीय जानकारी आखिर लीक कौन कर रहा है?
कार्रवाई या सिर्फ औपचारिकता?
हर साल अवैध खनन के खिलाफ अभियान चलाए जाते हैं, रास्ते तोड़े जाते हैं, बैठकें होती हैं और बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। इसके बावजूद रेत का अवैध कारोबार पूरी तरह बंद नहीं हो पाता।
जनता पूछ रही है कि क्या सिर्फ रास्ते तोड़ देने से समस्या खत्म हो जाएगी, या उन लोगों पर भी कार्रवाई होगी जिन्होंने वर्षों तक इस नेटवर्क को फलने-फूलने दिया?
जवाब का इंतजार
कलेक्टर के नेतृत्व में चल रही कार्रवाई निश्चित रूप से स्वागतयोग्य है, लेकिन यह भी जरूरी है कि खनिज विभाग अपनी जवाबदेही तय करे। आखिर अवैध रास्ते बने कैसे, उनका उपयोग किसने किया और इतने समय तक विभाग की निगाह उनसे दूर क्यों रही?
जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक रेत माफियाओं पर कार्रवाई के दावों के साथ-साथ विभागीय कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लगा रहेगा।










