‘खाकी’ का फर्ज, ‘कप्तान’ का अपनत्व : जब घायल जवान का हाथ थाम भावुक हुए एसपी, बोले— “तुम अकेले नहीं हो…
कटनी। कहते हैं कि खाकी वर्दी के भीतर जो दिल धड़कता है, वह अनुशासन और सख्ती की परतों के नीचे कहीं छुप जाता है। लेकिन बुधवार को कटनी में एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने यह साबित कर दिया कि पुलिस महकमे का मुखिया सिर्फ आदेश देने वाला ‘हाकिम’ नहीं, बल्कि अपने मातहतों के सुख-दुख का ‘अभिभावक’ भी होता है। आजाद चौक में अपराधियों की कायरतापूर्ण हरकत का शिकार हुए घायल जवान के घर जब पुलिस अधीक्षक (SP) अभिनय विश्वकर्मा पहुंचे, तो वहां का माहौल भावुकता और भरोसे से भर गया।
दहशत के साए में पहुंचा ‘उम्मीद का सूरज’
ड्यूटी के दौरान हुए जानलेवा हमले और चाकूबाजी के बाद घायल जवान का परिवार गहरे सदमे और खौफ में था। घर की चौखट पर पसरी इसी मायूसी के बीच जब खुद जिले के पुलिस कप्तान गाड़ी से उतरे, तो परिजनों की आंखें भर आईं। एसपी सीधे घायल जवान के घर पहुंचे। उन्होंने न सिर्फ उसके स्वास्थ्य की जानकारी ली, बल्कि बेहद आत्मीयता से उसका हाथ थाम लिया।
एसपी ने जवान की पीठ थपथपाते हुए कहा— “तुमने फर्ज निभाया है, तुम्हारी सुरक्षा और सम्मान की जिम्मेदारी अब मेरी है। तुम अकेले नहीं हो, पूरा महकमा तुम्हारे साथ खड़ा है।” कप्तान के इन शब्दों ने न सिर्फ घायल जवान का हौसला बढ़ाया, बल्कि परिजनों के चेहरे की चिंता को भी दूर कर दिया।
अपराधियों को सख्त संदेश: “बख्शेंगे नहीं”
एक तरफ जहां कप्तान का दिल अपने जवान के लिए पसीज रहा था, वहीं दूसरी तरफ उनकी आंखों में अपराधियों के लिए तीखा आक्रोश था। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कहा कि पुलिसकर्मी दिन-रात जनता की सुरक्षा में तैनात रहते हैं, उन पर हमला पूरी व्यवस्था पर हमला है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जब ‘मुखिया’ के तेवर देख कांप उठा अमला
इस पूरे घटनाक्रम में एसपी का एक और रूप देखने को मिला— एक ऐसा न्यायप्रिय शासक, जिसे अपनी ही टीम की लापरवाही कतई मंजूर नहीं थी। जैसे ही उन्हें पता चला कि घटना के बाद स्थानीय स्तर पर FIR दर्ज करने में देरी हुई, उनका पारा चढ़ गया। कप्तान ने तुरंत एक्शन मोड में आते हुए न सिर्फ तत्काल मामला दर्ज कराया, बल्कि लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों को ऐसी कड़ी फटकार लगाई कि पूरा अमला सन्न रह गया।
एसपी ने स्पष्ट कर दिया कि चाहे आम नागरिक हो या पुलिस का जवान, न्याय के काम में ढिलाई और देरी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उनकी इसी सख्ती का नतीजा था कि पुलिस ने तत्काल घेराबंदी कर आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।
महकमे में दौड़ी विश्वास की लहर
अक्सर देखा जाता है कि पुलिसकर्मी अपनी तकलीफों को कर्तव्य की वेदी पर कुर्बान कर देते हैं। लेकिन जब विभाग का सर्वोच्च अधिकारी खुद सारे प्रोटोकॉल तोड़कर एक अदने से सिपाही के घर पहुंच जाए, तो वह महकमा सिर्फ एक सरकारी विभाग नहीं, एक ‘परिवार’ बन जाता है। आज कटनी के पुलिस कप्तान ने अपनी संवेदनशीलता से न सिर्फ एक पीड़ित परिवार का आंसू पोंछा है, बल्कि जिले के हजारों जवानों के भीतर यह विश्वास जगा दिया है कि उनका ‘कप्तान’ हर मोर्चे पर उनके पीछे ढाल बनकर खड़ा है।









