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कटनी में बेखौफ बदमाश, चंद घंटों में दूसरी खूनी वारदात! चंद घंटो मे ही हत्या के बाद फिर चाकूबाजी

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कटनी में बेखौफ बदमाश, चंद घंटों में दूसरी खूनी वारदात!
चंद घंटो मे ही हत्या के बाद फिर चाकूबाजी 

आखिर किसके भरोसे है शहर की सुरक्षा?

मंगलनगर मे चाकूओं से गोदकर हत्या के बाद फिर बरगवां में अनुराग पर जानलेवा हमला, खून से लाल होती सड़कों ने खड़े किए बड़े सवा

कटनी। जिले में कानून-व्यवस्था पूरी तरह वेंटिलेटर पर आ चुकी है और खाकी का इकबाल मानो घुटने टेक चुका है। अपराधियों के हौसले इस कदर सातवें आसमान पर हैं कि वे पुलिस को सरेआम चुनौती दे रहे हैं। अभी मंगलनगर हत्याकांड की सनसनी ठंडी भी नहीं पड़ी थी कि चंद घंटों के भीतर ही बरगवां क्षेत्र में एनकेजे थाना क्षेत्र के निवासी अनुराग दुबे पर चाकुओं से ताबड़तोड़ जानलेवा हमला कर दिया गया। खून से लथपथ युवक को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां वह जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा है।
सबसे शर्मनाक और बड़ा सवाल यह है कि आखिर कटनी किसके भरोसे है? एक तरफ पुलिस मंगलनगर हत्याकांड के आरोपियों को चंद घंटों में दबोचने का ढिंढोरा पीटकर अपनी पीठ थपथपाने में मसरूफ थी, तो वहीं दूसरी तरफ बेखौफ बदमाशों ने पुलिसिया दावों की धज्जियां उड़ाते हुए एक और खूनी वारदात को अंजाम दे डाला।

कागजी दावों के बीच लहूलुहान होती ‘विकास की नगरी’

जो कटनी कभी अपने उद्योग, व्यापार और अमन-चैन के लिए जाना जाता था, आज वह हत्या, चाकूबाजी, लूट और सरेराह गुंडागर्दी का ‘क्राइम हब’ बनता जा रहा है। हालात ये हैं कि आम नागरिक, व्यापारी, छात्र और नौकरीपेशा लोग घर से बाहर पैर रखने में भी थर-थर कांप रहे हैं। जनता पूछ रही है कि आखिर अपराध होने से पहले उन्हें रोकने की जिम्मेदारी किसकी है?

बड़ा सवाल: हर वारदात के बाद सिर्फ ‘गिरफ्तारी’ को अपनी सबसे बड़ी कामयाबी बताने वाली पुलिस यह क्यों भूल जाती है कि पुलिसिंग की असली सफलता आरोपी को पकड़ना नहीं, बल्कि अपराध होने से पहले उसे रोकना होती है? यदि एक ही दिन में हत्या और चाकूबाजी जैसी खूनी स्क्रिप्ट लिखी जा रही है, तो कानून-व्यवस्था की बहाली के दावे सिर्फ सफेद झूठ हैं।

अब जागना होगा हुक्मरानों को!

बरगवां चाकूबाजी मामले में पुलिस अब लकीर पीट रही है और जांच का घिसा-पिटा राग अलाप रही है। लेकिन कटनी की जनता अब खोखले आश्वासनों से थक चुकी है। अगर वक्त रहते अपराधियों के दिलों में कानून का वो खौफ पैदा नहीं किया गया जो अपराधियों की रीढ़ तोड़ दे, तो वो दिन दूर नहीं जब कटनी पूरी तरह अराजकता की आग में झुलस जाएगा। अब समय आ गया है कि खाकी अपनी सुस्ती छोड़े और अपराधियों पर ऐसा हंटर चलाए कि वे सड़कों पर नहीं, बल्कि सलाखों के पीछे नजर आएं।

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