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बड़वारा में ‘जहर उगलती’ 12 फैक्ट्रियां! विधायक ने खुद उठाए सवाल, अब क्या होगी कार्रवाई?

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बड़वारा में ‘जहर उगलती’ 12 फैक्ट्रियां! विधायक ने खुद उठाए सवाल, अब क्या होगी कार्रवाई?

पुराने टायरों से तेल निकालने का खेल, गांवों की सांसों पर संकट!

कटनी/बड़वारा। बड़वारा विधानसभा क्षेत्र में संचालित 12 टायर ऑयल निर्माण इकाइयों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। क्षेत्रीय विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह ने स्वयं मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इन इकाइयों की जांच और कार्रवाई की मांग की है। विधायक के पत्र ने उन आशंकाओं को हवा दे दी है जिनकी चर्चा लंबे समय से ग्रामीणों के बीच होती रही है।

विधायक द्वारा भेजे गए पत्र में साफ तौर पर उल्लेख किया गया है कि जनपद पंचायत बड़वारा क्षेत्र में संचालित टायर से तेल निकालने वाली इकाइयों से पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचने की शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोप है कि पुराने टायरों को जलाकर तेल निकाला जा रहा है, जिससे निकलने वाला धुआं, दुर्गंध और जहरीले तत्व आसपास के गांवों की हवा को प्रदूषित कर रहे हैं।

जब विधायक को लिखना पड़ा पत्र, तो जिम्मेदार विभाग अब तक क्या कर रहे थे?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि क्षेत्र में 12-12 इकाइयां संचालित हैं और उनसे प्रदूषण फैलने की शिकायतें इतनी गंभीर हैं कि विधायक को मुख्यमंत्री तक पत्र भेजना पड़ गया, तो आखिर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उद्योग विभाग और स्थानीय प्रशासन अब तक क्या कर रहे थे?

क्या इन इकाइयों के पास सभी वैध पर्यावरणीय स्वीकृतियां हैं?

क्या प्रदूषण नियंत्रण मानकों का पालन हो रहा है?

क्या नियमित निरीक्षण किए गए?

और यदि सब कुछ नियमों के तहत हो रहा था, तो फिर विधायक को हस्तक्षेप की जरूरत क्यों पड़ी?

ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर खतरा?

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि इन इकाइयों से निकलने वाले धुएं और प्रदूषण का असर मानव स्वास्थ्य और कृषि पर पड़ रहा है। स्थानीय लोगों को श्वास संबंधी समस्याओं और पर्यावरणीय दुष्प्रभावों का सामना करना पड़ रहा है। यदि यह दावा सही है, तो यह केवल पर्यावरण का नहीं बल्कि जनस्वास्थ्य का भी गंभीर मामला बन जाता है।

12 इकाइयों की सूची भी भेजी

विधायक ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र के साथ बड़वारा क्षेत्र में संचालित 12 कंपनियों की सूची भी संलग्न की है। इससे स्पष्ट है कि मामला केवल सामान्य शिकायत तक सीमित नहीं है, बल्कि विशिष्ट इकाइयों को चिन्हित कर जांच की मांग की गई है।

अब निगाहें सरकार पर

विधायक ने उच्च स्तरीय जांच कराकर पर्यावरणीय स्वीकृतियों, संचालन की वैधता और प्रदूषण नियंत्रण मानकों की पड़ताल करने तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह पत्र केवल फाइलों में घूमता रहेगा या फिर वास्तव में उन इकाइयों की जांच होगी जिन पर गांवों की हवा और लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने के आरोप लग रहे हैं?

यदि आरोप सही निकले, तो यह सिर्फ प्रदूषण का मामला नहीं होगा, बल्कि उन विभागों की जवाबदेही का भी प्रश्न होगा जिनकी आंखों के सामने कथित तौर पर यह पूरा खेल चलता रहा।

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