चार बार नाप-जोख, फिर भी नहीं बनी रिपोर्ट! आखिर कितना ‘नजराना’ चाहता था पटवारी
किसान को दौड़ाता रहा, जेब गर्म होते ही लोकायुक्त ने दबोचा
5 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार, तहसील में मचा हड़कंप
कटनी। किसानों की जमीनों पर कलम चलाने का अधिकार रखने वाले एक पटवारी की रिश्वतखोरी का खेल मंगलवार को उस समय बेनकाब हो गया, जब जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने उसे 5 हजार रुपये की घूस लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। स्लीमनाबाद तहसील के ग्राम कौड़िया में पदस्थ पटवारी स्वयं प्रकाश मेहरा सीमांकन रिपोर्ट के नाम पर किसान से रकम वसूलने की तैयारी में था, लेकिन इससे पहले ही लोकायुक्त का शिकंजा कस गया।
चार बार सीमांकन, फिर भी रिपोर्ट गायब!
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब किसान की जमीन का चार बार सीमांकन कराया जा चुका था, तो आखिर रिपोर्ट क्यों नहीं बनाई गई? क्या सरकारी कामकाज अब रिश्वत की रसीद पर ही आगे बढ़ता है? शिकायतकर्ता शिव कुमार जायसवाल का आरोप है कि पटवारी बिना पैसे लिए रिपोर्ट देने को तैयार नहीं था और उसे लगातार दफ्तरों के चक्कर कटवाए जा रहे थे।
‘सेवा-पानी’ नहीं तो रिपोर्ट नहीं!
सूत्र बताते हैं कि किसान की मजबूरी को कमाई का जरिया बना चुके पटवारी ने सीमांकन रिपोर्ट को ही बंधक बना लिया था। किसान खेत छोड़कर दफ्तरों की धूल फांकता रहा, लेकिन साहब की कलम तब तक नहीं चली, जब तक जेब गर्म करने की बात नहीं हुई।
लोकायुक्त ने बिछाया जाल, रिश्वत लेते ही फंसा खेल
परेशान किसान ने आखिरकार लोकायुक्त का दरवाजा खटखटाया। शिकायत सही मिलने के बाद टीम ने जाल बिछाया। मंगलवार को जैसे ही पटवारी ने 5 हजार रुपये हाथ में लिए, लोकायुक्त टीम ने उसे धर दबोचा। केमिकल लगे नोटों की जांच में हाथ गुलाबी होते ही रिश्वतखोरी का पूरा खेल उजागर हो गया।
राजस्व विभाग पर फिर उठे सवाल
इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली कटघरे में है। सवाल यह है कि क्या किसानों को उनके वैधानिक अधिकार पाने के लिए हर बार रिश्वत देनी पड़ेगी? क्या यह सिर्फ एक पटवारी की करतूत है या फिर तहसील कार्यालयों में फैली उस व्यवस्था की झलक, जहां बिना ‘चढ़ावे’ के फाइलें आगे नहीं बढ़तीं?
अब निगाहें जांच पर
लोकायुक्त की कार्रवाई ने एक घूसखोर पटवारी को तो बेनकाब कर दिया, लेकिन बड़ा सवाल अब भी बाकी है—क्या जांच सिर्फ 5 हजार रुपये तक सीमित रहेगी या फिर उन फाइलों और मामलों की भी पड़ताल होगी, जिनमें किसानों और आम लोगों को इसी तरह परेशान किया गया?
फिलहाल इतना तय है कि किसान को दौड़ाने वाला पटवारी अब खुद जांच एजेंसियों के सवालों से बचता नजर नहीं आ रहा।










