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एक नाम, दो तबादले और कप्तान के हस्ताक्षर!

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कटनी पुलिस के तबादला आदेश में बड़ा झोल, गंभीर कप्तान या लापरवाह कार्यप्रणाली?

कटनी। जिले की पुलिस व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के नाम पर जारी तबादला आदेश अब खुद सवालों के घेरे में आ गया है। पुलिस अधीक्षक के हस्ताक्षर से जारी आधिकारिक दस्तावेज में ऐसी विसंगति सामने आई है जिसने पूरे आदेश की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।

मामला कार्यवाहक प्रधान आरक्षक शिवबालक प्रजापति (क्रमांक-180) से जुड़ा है। जारी तबादला सूची में एक ही कर्मचारी का नाम दो बार दर्ज दिखाई दे रहा है। इतना ही नहीं, दोनों प्रविष्टियों में वर्तमान पदस्थापना कोतवाली दर्शाई गई है, लेकिन नवीन पदस्थापना अलग-अलग बताई गई है। एक जगह कोतवाली से एनकेजे थाना और दूसरी जगह कोतवाली से विजयराघवगढ़ थाना भेजे जाने का उल्लेख है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर शिवबालक प्रजापति जाएंगे कहां? एनकेजे या विजयराघवगढ़?

हस्ताक्षर से पहले नहीं हुई जांच?

यह कोई साधारण कागज नहीं, बल्कि पुलिस अधीक्षक के हस्ताक्षर से जारी सरकारी आदेश है। ऐसे में यदि एक ही कर्मचारी का नाम दो बार दर्ज हो जाए और दोनों जगह अलग-अलग पदस्थापना लिखी हो, तो सवाल केवल टंकण त्रुटि का नहीं रह जाता, बल्कि पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया पर खड़ा होता है।

क्या आदेश जारी करने से पहले सूची का सत्यापन नहीं किया गया?

क्या दस्तावेज की जांच-परख केवल औपचारिकता बनकर रह गई है?

क्या बिना मिलान किए ही सरकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए गए?

पूरी सूची पर उठे सवाल

जानकारों का कहना है कि यदि एक नाम दो बार दर्ज हो सकता है, तो यह मानने का आधार भी बनता है कि सूची में अन्य त्रुटियां भी हो सकती हैं। ऐसे में सवाल केवल एक कर्मचारी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे तबादला आदेश की शुद्धता और विश्वसनीयता पर है।

पुलिस महकमे के भीतर भी इस विसंगति को लेकर चर्चाओं का दौर तेज है। कर्मचारी यह जानना चाहते हैं कि आखिर वास्तविक आदेश कौन सा माना जाए और यदि गलती हुई है तो उसकी जवाबदेही किसकी तय होगी।

कप्तान साहब जवाब दें…

जिले की कानून-व्यवस्था की कमान संभालने वाले पुलिस अधीक्षक से अब यह सवाल पूछा जा रहा है कि आखिर सरकारी दस्तावेज में इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई?

क्या यह जल्दबाजी का परिणाम है?

या फिर आदेशों की जांच-परख की व्यवस्था पूरी तरह कागजी बनकर रह गई है?

बड़ा सवाल

जब एक ही प्रधान आरक्षक को कोतवाली से एनकेजे भी भेज दिया जाए और कोतवाली से विजयराघवगढ़ भी, तो फिर जनता यह कैसे माने कि पूरी तबादला सूची त्रुटिरहित है?

हालांकि, तबादला सूची को लेकर एक और बड़ा सवाल भी चर्चा में है। पुलिस विभाग में ऐसे कई अधिकारी और कर्मचारी हैं जिन्हें वर्षों नहीं बल्कि दशकों से एक ही थाना, चौकी या डिवीजन में पदस्थ देखा जा रहा है। स्थानीय लोग तंज कसते हुए कहते हैं कि “उन्हें एक ही जगह देखते-देखते लोगों के बाल सफेद हो गए, लेकिन उनके तबादले की फाइल शायद अभी तक नहीं खुली।”
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या तबादला नीति सभी पर समान रूप से लागू होती है या फिर कुछ चुनिंदा नामों तक ही सीमित रह जाती है? यदि विभाग में लंबे समय से जमे कर्मचारियों को हटाने का उद्देश्य था, तो फिर कई स्थायी चेहरों के नाम सूची से गायब क्यों हैं?

कटनी अब जवाब मांग रहा है। क्योंकि सवाल सिर्फ एक नाम का नहीं, बल्कि सरकारी आदेशों की विश्वसनीयता का है।

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