अखिलेश को कुठला, चौबे को विजयराघवगढ़ और महिमा को ढीमरखेड़ा की कमान; आदेश पर एसपी के हस्ताक्षर, लेकिन फैसले पर उठ रहे सवाल
कटनी। जिले के पुलिस महकमे में रविवार शाम जारी हुई तबादला सूची ने जितनी हलचल अपराधियों में नहीं मचाई, उससे कहीं ज्यादा राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में मचा दी है। कागज पर आदेश पुलिस अधीक्षक के हैं, लेकिन चर्चा इस बात की है कि आखिर इन पोस्टिंगों की पटकथा लिखी किसने?
पुलिस विभाग में हुए इस फेरबदल के बाद एक बार फिर यह सवाल जोर पकड़ने लगा है कि जिले के महत्वपूर्ण थानों की कमान तय करने का अधिकार वास्तव में किसके पास है—जिले के कप्तान के पास या फिर किसी अदृश्य ‘हाईकमान’ के पास?
कौन पहुंचा कहां, किसकी कुर्सी खिसकी?
तबादला सूची के अनुसार निरीक्षक अखिलेश दाहिया को कुठला थाना प्रभारी बनाया गया है। अभिषेक चौबे को ढीमरखेड़ा से विजयराघवगढ़ भेजा गया है, जबकि निरीक्षक महिमा रघुवंशी को ढीमरखेड़ा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं विजयराघवगढ़ थाना प्रभारी रितेश शर्मा को पुलिस लाइन अटैच कर दिया गया।
फैसले प्रशासनिक बताए जा रहे हैं, लेकिन इन्हीं निर्णयों ने सबसे ज्यादा चर्चाओं को जन्म दिया है।
खाकी पर ‘हाईकमान कल्चर’ हावी?
जैसे ही सूची सामने आई, पुलिस महकमे से लेकर चाय की दुकानों तक एक ही चर्चा शुरू हो गई—क्या जिले में अब थाना प्रभारियों की नियुक्ति भी बाहरी सिफारिशों से तय होगी?
सूत्रों की मानें तो महत्वपूर्ण और प्रभावशाली थानों की पोस्टिंग को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही थी। ऐसे में तबादलों के बाद यह सवाल और गहरा गया है कि आखिर निर्णय लेने वाला वास्तविक केंद्र कौन है?
बड़ा सवाल
जब फैसले कहीं और से होने हैं, तो फिर जिले के प्रशासनिक मुखिया की जवाबदेही किस बात की?
अपराध बेलगाम, सिस्टम पोस्टिंग में व्यस्त!
कटनी में पिछले कुछ समय से चाकूबाजी, मारपीट, गैंगवार और कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। जनता अपराध नियंत्रण की उम्मीद कर रही है, लेकिन पुलिस विभाग के भीतर चर्चा पोस्टिंग और तबादलों की ज्यादा सुनाई दे रही है।
लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या विभाग की प्राथमिकता अपराधियों पर लगाम कसना है या फिर पसंदीदा कुर्सियों का समीकरण साधना?
कार्यकुशलता या सिफारिश?
जनमानस में यह धारणा तेजी से मजबूत हो रही है कि थाना प्रभारी जैसे अहम पदों पर तैनाती का पैमाना प्रदर्शन और कार्यकुशलता नहीं, बल्कि पहुंच और पैरवी बनती जा रही है।
यही कारण है कि हर नई तबादला सूची के साथ पुलिस विभाग की निष्पक्षता पर बहस छिड़ जाती है और खाकी की साख सवालों के घेरे में आ खड़ी होती है।
अब नए प्रभारियों की अग्निपरीक्षा
फिलहाल नए थाना प्रभारी अपनी-अपनी कुर्सियां संभालने की तैयारी में जुट गए हैं। लेकिन असली चुनौती अब शुरू होगी। बढ़ते अपराधों पर अंकुश लगाना, जनता का भरोसा जीतना और यह साबित करना कि वे किसी ‘रिमोट कंट्रोल’ से संचालित नहीं हैं—यही उनकी सबसे बड़ी परीक्षा होगी।
कटनी की जनता अब पोस्टिंग की राजनीति नहीं, सड़कों पर कानून का असर देखना चाहती है। आने वाले दिनों में साफ होगा कि यह फेरबदल अपराध पर प्रहार साबित होता है या फिर सिर्फ कुर्सियों का एक और खेल।










