पुलिस पर भरोसा टूटा या कानून को दिखा दिया ठेंगा
महिला से बदसलूकी के आरोप पर भड़का गुस्सा, नगर निगम कार्यालय में घुसकर कर्मचारी से मारपीट, वायरल वीडियो से मचा हड़कंप
कटनी। शहर में कानून का राज चल रहा है या फिर भीड़ का? यह सवाल उस वायरल वीडियो के बाद खड़ा हो गया है, जिसमें नगर निगम के अतिक्रमण विभाग के कार्यालय में एक कर्मचारी के साथ मारपीट होती दिखाई दे रही है। घटना की वजह एक महिला से कथित अभद्र व्यवहार को बताया जा रहा है, लेकिन अब बहस इस बात पर छिड़ गई है कि क्या किसी आरोप के बाद कानून को हाथ में लेना जायज हो जाता है?
जानकारी के मुताबिक अतिक्रमण अमले ने सड़क पर खड़ी एक स्कूटी को कार्रवाई के दौरान जब्त कर कार्यालय पहुंचाया था। आरोप है कि कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद महिला के साथ अभद्र व्यवहार किया गया। घटना की जानकारी फैलते ही कुछ लोग बड़ी संख्या में नगर निगम कार्यालय पहुंच गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पहले बहस हुई और फिर देखते ही देखते मामला हाथापाई में बदल गया। वायरल वीडियो में एक युवक के साथ मारपीट होती नजर आ रही है, जबकि आसपास मौजूद लोग बीच-बचाव करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
क्या अब भीड़ तय करेगी सही-गलत?
यदि किसी महिला के साथ दुर्व्यवहार हुआ था तो उसके लिए पुलिस, प्रशासन और न्यायिक प्रक्रिया मौजूद है। लेकिन सवाल यह है कि क्या अब हर विवाद का फैसला भीड़ करेगी? क्या सरकारी दफ्तरों में घुसकर कर्मचारियों से मारपीट करना विरोध का नया तरीका बनता जा रहा है?
कानून के जानकारों का कहना है कि किसी भी सरकारी कार्यालय में घुसकर हंगामा करना और कर्मचारी के साथ मारपीट करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में भावनाओं से ज्यादा कानून का पालन जरूरी होता है।
अगर आरोप सही हैं तो जिम्मेदारों पर भी गिरेगी गाज?
दूसरी तरफ यदि महिला से अभद्र व्यवहार के आरोप सही साबित होते हैं तो संबंधित कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय होना चाहिए। सरकारी कार्रवाई के नाम पर किसी नागरिक की गरिमा से खिलवाड़ करने का अधिकार किसी को नहीं है।
वायरल वीडियो ने खोली व्यवस्था की परतें
यह घटना केवल एक मारपीट का मामला नहीं है, बल्कि शहर में बढ़ती असहिष्णुता और कानून पर घटते भरोसे की तस्वीर भी पेश करती है। एक तरफ सरकारी अमले पर सवाल हैं, तो दूसरी तरफ कानून हाथ में लेने वालों की भूमिका भी जांच के घेरे में है।
घटना के बाद नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी कोतवाली थाना पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला जांच में ले लिया है। अब देखना यह होगा कि कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रहती है या फिर वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे चेहरों तक भी कानून पहुंचता है।
अगर हर आरोप का जवाब मारपीट है, तो फिर थाने, अदालत और कानून किसलिए हैं?










