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एमपी पुलिस में फिर शुरू हुआ “कार्यवाहक प्रमोशन” का खेल: PHQ का नया फरमान जारी, 15 दिन में कार्रवाई के निर्देश

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भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने एक बार फिर पुलिस विभाग में “कार्यवाहक प्रभार” देने की प्रक्रिया तेज कर दी है। पुलिस मुख्यालय भोपाल से जारी एक महत्वपूर्ण आदेश ने पूरे महकमे में हलचल मचा दी है। डीजीपी कैलाश मकवाना के हस्ताक्षर से जारी पत्र में आरक्षक से लेकर निरीक्षक स्तर तक तथा लिपिकीय संवर्ग के कर्मचारियों को उच्च पद का “कार्यवाहक प्रभार” देने की कार्रवाई तत्काल प्रभाव से शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
12 मई 2026 को जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि जिले, इकाई और रेंज स्तर पर समितियां गठित कर 15 दिनों के भीतर उच्च पद का कार्यवाहक प्रभार देने की कार्रवाई पूरी कर पुलिस मुख्यालय को अवगत कराया जाए। वहीं अधिकारियों-कर्मचारियों के समयमान वेतनमान, गोपनीय चरित्रावली और सेवा विवरण भी एक सप्ताह के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।
दरअसल, यह कार्रवाई पुलिस मुख्यालय के पुराने जीओ क्रमांक 148/21 दिनांक 10 फरवरी 2021 के तहत की जा रही है, लेकिन बीच में यह प्रक्रिया धीमी पड़ गई थी। अब PHQ ने नए पत्र के जरिए इसे फिर से गति दे दी है। आदेश में यह भी साफ किया गया है कि प्रधान आरक्षक से सहायक उप निरीक्षक स्तर तक की कार्रवाई रेंज डीआईजी द्वारा और अन्य संवर्ग की कार्रवाई पुलिस मुख्यालय स्तर से की जाएगी।
इस आदेश के बाद पुलिस विभाग में लंबे समय से उच्च पद की जिम्मेदारी का इंतजार कर रहे कर्मचारियों में उम्मीद जगी है, वहीं विभागीय गलियारों में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि “कार्यवाहक प्रभार” की इस कवायद में कहीं फिर सिफारिश और रसूख का खेल हावी न हो जाए।
सूत्रों की मानें तो कई जिलों में पहले से ही वरिष्ठता, गोपनीय चरित्रावली और विभागीय रिकॉर्ड को लेकर विवाद बने हुए हैं। ऐसे में जल्दबाजी में होने वाली यह प्रक्रिया नए विवादों को जन्म दे सकती है। हालांकि पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी कार्रवाई नियमों के तहत और निर्धारित समयसीमा में पूरी की जाए।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिले और रेंज स्तर पर बनने वाली समितियां कितनी पारदर्शिता के साथ काम करती हैं और कितने कर्मचारियों को वास्तविक रूप से उच्च पद का लाभ मिल पाता है।

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